Monday, 20 January, 2014

होवे पुलिस अधीन, जाय क्यूँ अलग कमाई

माई-मामा मारते, मजा यहाँ हरवक्त |
पुलिस उगाही में जुटी, बा-शिंदे के भक्त |

बा-शिंदे के भक्त, आपका गर बन पाये |
पाया बँगला कार, मजा दुगुना हो जाये  |

छुटभैये बड़वार, दलाली तब चमकाई |
होवे पुलिस अधीन, जाय क्यूँ अलग कमाई --

5 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल मंगलवार (21-01-2014) को "अपनी परेशानी मुझे दे दो" (चर्चा मंच-1499) पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    ReplyDelete
  2. बहुत ही सुंदर प्रस्तुति....

    ReplyDelete

लिखिए अपनी भाषा में

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...